सोमवार, 25 अप्रैल 2016

"गीतिकालोक"- ज्ञान का अनमोल खज़ाना

कन्हैया लखीमपुरी 

             बागपत (टटीरी)के कार्यक्रम मेँ जब अवनीश त्रिपाठी जी के अनुरोध पर परमादरणीय ओम नीरव गुरू जी ने जब मंच से घोषणा की कि "गीतिकालोक" का भव्य विमोचन अवनीश जी के संयोजन मेँ सुल्तानपुर (उ॰प्र॰) मे होगा तो वहाँ उपस्थित कवितालोक परिवार के सदस्योँ /रचनाकारोँ के चेहरोँ की खुशी देखने लायक थी। एक तरफ टटीरी से विछड़ने का दु:ख तो दूसरी तरफ सुल्तानपुर मेँ फिर से मिलने की खुशी !!अप्रतिम भावपूर्ण चेहरे !!
जल्दी ही सुल्तानपुर कार्यक्रम का समय 7 अप्रैल  2016 घोषित कर दिया! एक दूसरे से मिलना!गीतिकालोक का विमोचन! मेरे गाँव की चिनमुनकी (आदरणीय धीरज श्रीवास्तव जी का प्रथम गीत संग्रह) का विमोचन!कवितापाठ! अद्भुत स्मृति मात्र से रोम रोम पुलकित हो उठता!
            5 अप्रैल को आदरणीय मनोज मानव जी से फोन पर वार्तालाप हुआ कि हम लोग 6 अप्रैल को लखनऊ से साथ साथ सुल्तानपुर चलेँगे!6 अप्रैल को लखनऊ पहुँचने वाली जिस ट्रेन मेँ मैँ था वो ढ़ाई घंटे लेट थी पर मनोज जी का स्नेह तो देखिए आप तीन घंटे मेरा इंतजार करते रहे। कौन कहता है कि आभासी दुनिया के मित्र भी आभासी होते हैँ।
जब लखनऊ पहुँचा तो चार मित्र मेरे स्वागत के लिए खड़े थे!आदरणीय मनोज मानव जी, उमाकान्त पाण्डेय जी, बृजेश सिंह जी और भैया राहुल द्विवेदी स्मित जी। सबने मुझे एक साथ गले लगा लिया सारी थकान दूर हो गयी!
           अब शुरू हुई सुल्तानपुर की यात्रा !कभी टटीरी की बातेँ कभी कविता ,कभी कभी मनोविनोद!पता नही चला कब सुल्तानपुर में दरियापुर स्थित होटल पल्लवी पहुँच गये! अवनीश त्रिपाठी जी और आदरणीय धीरज श्रीवास्तव जी ने हम सबका जोरदार स्वागत गले मिलकर किया! नाश्ते और भोजन के उपरांत आद ‪ ‎गोप कुमार मिश्र जी, आद प्रमिला आर्या दी, आद समीर परिमल सर, भाई उमाकान्त पाण्डेय जी, आद विनीत सुराना किरण दीदी के साथ पूरी रात गोष्ठी चलती रही आनंद आ गया। 7अप्रैल की सुबह से कवितालोक के मित्रोँ का आना शुरू हो गया!जो भी मिलता गले से लगाता !इतना स्नेह और प्यार आभासी दुनिया के मित्रोँ मेँ!अद्भुत !
           भाई कालीचरण सिँह राजपूत जी, आद नगाइच रौशन जी सर, आद काँटी शुक्ला जी दीदी!, आद शुभदा दी,आद नीलम श्रीवास्तव जी दी!और तमाम मित्र!सबका स्नेह अनमोल रहा और जब परमआदरणीय ओम नीरव गुरू जी आये तो मानो सबको अनमोल निधि मिल गयी!एक एक कर सबको प्यार से गले लगाकर स्नेहाशीष दिया। अवनीश भैया जी बार बार सबसे चाय,नाश्ता और भोजन के बारे पूछते और आग्रह करते!इतना खयाल । 7अप्रैल को 2बजे हम लोग "पं0 रामनरेश त्रिपाठी सभागार" पहुँचे जहाँ पर भव्य मंच ने सभी का स्वागत किया! "गीतिकालोक" और "मेरे गाँव की चिनमुनकी" कृतियोँ का भव्य विमोचन परमादरणीय ओम नीरव जी और मुख्य अतिथि देवमणि जी द्वारा किया गया। फिर "गीतिका" पर विस्तृत व्याख्यान के उपरान्त शुरू हुआ काव्यपाठ सुबह 4बजे तक अनवरत चलता रहा। काव्यगंगा बहती रही। लगभग 10घंटे चले कवितापाठ मेँ कोई चुटकुलेबाजी नही सिर्फ और सिर्फ कविताएँ पढ़ी गयीँ!शुद्ध साहित्य। आदरणीय अवनीश त्रिपाठी जी ने इतना शानदार आयोजन किया जिसे शब्द देना बहुत मुश्किल है!
            "गीतिकालोक" के बारे मेँ क्या कहूँ!एक अनमोल खजाना है!जिन्होने पढ़ी है उन्हे पता है और जिन्होने नही पढ़ी उनसे निवेदन है कि एक बार ये पुस्तक आप जरूर पढ़ेँ
         जिसमेँ परमादरणीय Om neerav जी ने अनमोल खजाना भर दिया है!कवितालोक के जितने भी मित्र मिले किसी से मिलकर ऐसा नही लगा कि हम आभासी दुनिया के मित्रोँ से मिल रहे हैँ!इतना अपनापन!इतना प्यार!विदाई की वेला मेँ सबके नयन सजल थे!

आद  Awanish tripathi जी इतना भव्य और सफल कार्यक्रम करने लिए आपको नमन!
बस एक शिकायत है आपसे। हम सब तो सुल्तानपुर का दिल लूटने गये थे परन्तु आपने हम सबका दिल पहुँचते पहुँचते लूट लिया!
     आप सब गीतिलोक पढियेगा ज़रूर।
मैँ कवितालोक के अगले कार्यक्रम की प्रतीक्षा में हूँ ! 
आप भी हैँ न!!

           कन्हैया लखीमपुरी, लखीमपुर खीरी,उ0 प्र0