मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

गीतिका का एक वृहद् शोध ग्रन्थ-'गीतिकालोक'

मनोज मानव

गीतिका विधा एवं गीतिका संकलन गीतिकालोक
              कृतिकार--ओम नीरव

             मैं इतना सक्षम तो नहीं हूँ कि मैं पुस्तक की समीक्षा करूँ लेकिन जब पूरी पुस्तक पढ़ी तो दो शब्द कहने से स्वंय को रोक पाना असम्भव महसूस कर रहा हूँ पुस्तक को पढ़ने के बाद मालूम चला कि नीरव सर ने इतने दिन क्यों लगा दिए इस संकलन को पाठको के सामने लाने में , पुस्तक का प्रथम चरण उनका शोध कार्य है और सच पूछिए तो हिन्दी की असली सेवा की है उन्होंने इस शोध कार्य को पढ़ने के बाद पाठको के दिमाग से गीतिका के प्रति चले आ रहे दुराग्रह खुद खत्म हो जाएंगे 
            नवरचनाकारों के लिए तो ये पुस्तक एक वरदान है मात्रा भार , तुकान्त विधान , छंदों की विस्तृत जानकारी , मापनी विज्ञानं , क्या नही है इस पुस्तक में 
दुसरे भाग में 87 रचनाकारों की छंदों और मापनी पर आधारित शुद्ध गीतिकाये पूर्ण शिल्प विधान सहित किसी भी नवरचनाकार के लिए एक पाठशाला से कम नहीं हैं ।
        इस पूरी पुस्तक का अवलोकन कर मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि ये पुस्तक हर हिन्दी प्रेमी के पास संग्रहित होनी चाहिए जिसको पढ़कर छंद , मुक्तक और गीतिका लिखना सीखना बेहद आसान हो जाएगा ।
       इस अद्भुत संग्रह को पाठको तक पहुँचाने के लिए नीरव सर को मेरा बारम्बार नमन ।

मनोज मानव
बिजनौर, उत्तर प्रदेश