शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

कवितालोक द्वारा 'गीतिका गंगोत्री' का सफल आयोजन,मोतीमहल वाटिका,लखनऊ

गीतिका गंगोत्री

      कवितालोक सृजन संस्थान के सौजन्य से हिन्दी गीतिका को समर्पित ‘गीतिका गंगोत्री’ और सम्मान समारोह ‘गागर में सागर’ राष्ट्रीय पुस्तक मेला मोतीमहल वाटिका हजरतगंज लखनऊ मे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अनिल मिश्र की अध्यक्षता और गीतिकाकार सुनील त्रिपाठी के संयोजन में सम्पन्न हुआ। समारोह में साहित्यगंधा के संपादक यशभारती सर्वेश अस्थाना मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। समारोह के प्रथम चरण में संरक्षक ओम नीरव ने उत्तरीय और सम्मान पत्र भेंटकर तीस गीतिकाकारों को गीतिका गंगोत्री, तीन काव्य साधकों को ‘काव्य गंगोत्री’, साहित्यसेवी प्रकाशक सुभाष चंद्रा को ‘प्रकाशन गंगोत्री’ और राष्ट्रीय पुस्तक मेला के संयोजक देवराज अरोड़ा को ‘ग्रंथ गंगोत्री’ सम्मान से विभूषित किया। सम्मान समारोह का संचालन सुनील त्रिपाठी ने किया। दूसरे चरण ‘गीतिका गंगोत्री’ में गीतिकाकारों ने हिन्दी गीतिकाओं की सरस धारा प्रवाहित कर श्रोताओं को रस-विभोर कर दिया। गीतिका गंगोत्री की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि  इसका संचालन करते हुए गीतिका-विधा के प्रवर्तक ओम नीरव ने काव्य-पाठ के बीच-बीच पढ़ी गयी प्रत्येक गीतिका के आधारछंद, मापनी, समांत, पदांत आदि की रोचक व्याख्या कर श्रोताओं को आश्चर्य चकित कर दिया। मंजुल मंज़र लखनवी की वाणीवंदना से प्रारम्भ हुई गीतिका गंगोत्री में काव्य पाठ करते हुए उमाकांत पाण्डेय ने गीतिका का परिचय कराते हुए यह युग्म पढ़कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया-
यह छंद जिसपर मैं पढ़ रहा हूँ प्रसिद्ध वाचिक अनंगशेखर,
लगालगागा की मापनी पर यही तो नीरव की गीतिका है।
मनकापुर से पधारे धीरज श्रीवास्तव ने जीवन के कटु यथार्थ को अपनी गीतिका में कुछ इसप्रकार ढाला-
और भी पाना बहुत कुछ ज़िंदगी तुमसे हमें,
कब कटा जीवन किसी का चुंबनी उपहार पर।
वरिष्ठ कवि मधुकर अष्ठाना की गीतिका के इस युग्म पर श्रोता बरबस वाह-वाह कर उठे-
अर्थ की खोज में व्यर्थ से शब्द हैं,
कल्पना पांखुरी-सी झरी रह गयी।
छंदाचार्य रामदेव लाल विभोर ने अपनी गीतिका में युग को दर्पण दिखाते हुए कहा-  
कलयुग है रंग लाया कहते विभोर सच-सच,
अब कृष्ण का न द्वापर, अब राम का न त्रेता।
कानपुर से आयीं डॉ. मंजु श्रीवास्तव ने दासता की वेदना को अपने युग्म में ढालते हुए कहा-
नापते पंछी रहे जो नित्य ही धरती-गगन
मुस्कराकर बंद पिंजड़े में भला कैसे रहें।
गोंडा से पधारे उमाशंकर शुक्ल की गीतिका में सामाजिक विकृति का प्रतिबिंब देखने को मिला-
दुर्व्यसनों में लिप्त और जो है व्यभिचारी,
नैतिकता का पाठ आजकल वहीं पढ़ाता।
बिजनौर से पधारे गीतिकाकार मनोज मानव ने मनहर घनाक्षरी पर आधारित गीतिका सुनाकर श्रोताओं को तालियाँ बजाने पर विवश कर दिया-
बढ़ रहे अपराध, सैकड़ों, न एक आध,
खतरे में घिरी हुई आन-बान शान है।
घर-घर की कहानी, नशे में लूटी जवानी,
झूम रहे युवकों को लठियाना चाहिए।
संयोजक सुनील त्रिपाठी ने लेखनी के धर्म को कुछ इसप्रकार उजागर किया-
सत्य लिखने का अगर साहस न हो तो,
व्यर्थ है इस लेखनी को फिर उठाना।
हरीश चन्द्र लोहुमी के इस युग्म पर बहुत वाहवाही मिली-
पथिक काव्य के भूल मत जाइयेगा,
सृजन से सजी वीथिका का निमंत्रण।
राहुल द्विवेदी स्मित ने गीतिका विधा पर गीतिका सुनाते हुए कहा-
छंद की शुद्धता सौम्यता के लिए,
अनवरत है समर्पित विधा गीतिका।
गोला गोकर्णनाथ से पधारे राम कुमार गुप्त ने कहा-
ज़िंदगी घन के लिए केवल घुटन है।
बूंद का हरबार ही जीवन पतन है।
वरिष्ठ गीतिकाकार श्याम फतनपुरी ने बेटियों को समर्पित युग्म पढ़कर तालियाँ बटोरी-
बेटियों को है बचाना अब हमें बढ़कर,
स्वप्न उनकी आँख नें भी खूब सजते हैं।
ओम नीरव ने सुनाया -
सत्य ने सिर उठाया तनिक जो कहीं,
झूठ की संगठित हो गईं टोलियाँ।
अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए डॉ अनिल मिश्र ने गीतिका का एक नए स्वरूप में प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को रस-विभोर कर दिया -
आओ यशुदा दुलारे हाँ हमारे अंगना।
आओ यमुना किनारे हाँ कामारे अंगना।
मुख्य अतिथि सर्वेश अस्थाना ने गीतिका गंगोत्री को एक अभूतपूर्व परिकल्पना बताते हुए हिन्दी-सेवा के लिए कवितालोक की सराहना की। विशिष्ट अतिथि डॉ. अमिता दुबे ने इस आयोजन को काव्यशिल्पियों के लिए उपयोगी बताते हुए कवितालोक का एक कार्यशाला के रूप में स्वागत किया। गीतिका गंगोत्री में गीतिका-गुंजन करने वाले अन्य कवियों में मुख्य थे- मंजुल मंजल लखनवी, सौरभ टंडन शशि, रेनू द्विवेदी, डॉ अजय प्रसून, कुमार तरल, आभा मिश्रा, विपिन मलिहाबादी, अशोक अवस्थी, चेतराम अज्ञानी, केवल प्रसाद सत्यम, नागेंद्र सोनी, गौरीशंकर वैश्य विनम्र, सुंदर लाल सुंदर, डॉ उमेश श्रीवास्तव, डॉ प्रेमलता त्रिपाठी,डॉ हरि फैजाबादी

रिपोर्ट- अवनीश त्रिपाठी

मंगलवार, 1 अगस्त 2017

कवितालोक काव्यशाला में प्रेमलता त्रिपाठी व गौरीशंकर विनम्र को कवितालोक रत्न एवं कुमार तरल को गीतिका रत्न

           कवितालोक सृजन संस्थान के तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन के अवसर पर एक काव्यशाला का आयोजन महोना के चन्द्र वाटिका शिक्षा निकेतन में व्यवस्थापक डॉ० सी.के. मिश्र जी के सौजन्य से किया गया। आयोजन की अध्यक्षता अनागत संस्था के संरक्षक डॉ० अजय प्रसून जी ने की तथा संयोजन और संचालन युवा कवि राहुल द्विवेदी स्मित ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री प्रेमलता त्रिपाठी जी और विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री कुमार तरल जी, श्री कमलेश मौर्य 'मृदु' जी व श्री गौरी शंकर वैश्य 'विनम्र' जी उपस्थित रहे।  काव्यशाला का प्रारम्भ केदार नाथ शुक्ल जी की सुमधुर वाणी वंदना से हुआ । इस अवसर पर अनेक कवियों ने छंद, मुक्तक, गीत, गीतिका, ग़ज़ल, व्यंग्य आदि के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर लिया । साथ ही विद्यालय के बच्चों ने अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति के आधार पर मंचासीन अतिथि व विशेषज्ञों से साहित्य व कविता के सन्दर्भ में अपने प्रश्न पूछे और उनका संतुष्टि पूर्ण उत्तर प्राप्त किया । प्रश्न पूछने वाले बच्चों में कक्षा १० के छात्र गुफरान ने हिंदी भाषा में अन्य भाषाओं- अंग्रेजी, उर्दू आदि के बढ़ते प्रभाव पर चिंता दर्शाता हुआ प्रश्न रखा तो कक्षा- १० से ही आयुष ने कविता लिखने के लिए प्रारम्भिक शर्तों को जानने की उत्सुकता जताई , साथ ही कक्षा ९ की छात्रा सदफ ने अपने पाठ्यक्रम की पुस्तको में वर्णित  कविताओं और आधुनिक कविताओं के बीच के अंतर को जानना चाहा ।
     कार्यक्रम में कवितालोक सृजन संस्थान के संरक्षक ओम नीरव जी ने सुश्री प्रेमलता त्रिपाठी जी व श्री गौरीशंकर वैश्य 'विनम्र' जी को 'कविता लोक रत्न' व श्री कुमार तरल जी को 'गीतिका रत्न' के सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया ।
         इस अवसर पर अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए डॉ० अजय प्रसून जी ने 'एक तीखी कटार है यारों, ये ग़ज़ल धारदार है यारों ।' सुनाकर कार्यक्रम को उत्कृष्टता प्रदान की ।
कविता लोक के संरक्षक ओम नीरव जी ने 'जन-मन भाये, रच जाये, बस जाए उर, सुपथ दिखाये, काव्य वह मीत रचिये ।' पंक्तियों में एक सच्ची कविता के मूल तत्वों को स्वर दिए ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रेमलता त्रिपाठी जी ने ' लाज से पलकें झुकाते रह गए, पाँव से नूपुर बजाते रह गए ।।'  सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया ।
कुमार तरल जी ने 'आन बान शान पे जो किये कुर्बान जान, ध्यान में शहीदों कई शहादत बनी रहे ।' पंक्तियों से दीश के शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए ।
सीतापुर से पधारे व मंचों के सशक्त हस्ताक्षर केदार नाथ शुक्ल जी ने 'इतिहास लगा रोने जिस दम, जिस समय सिसक भूगोल उठी । तुलसी के स्वर में सब जनता जय-जय सुरनायक बोल उठी ।। ' जैसी पंक्तियों से महाकवि तुलसी दासजी व उनके साहित्य व समाज मे योगदान को स्मरण किया ।
गौरी शंकर वैश्य विनम्र जी ने 'भूख का मंत्र रट गया है अब, खेत टुकड़ों में बंट गया है अब' सुनाकर सभी को भारतीय संस्कृति में संस्कारों की महत्ता का स्मरण कराते हुए संस्कारो के ह्रास पर चिंता व्यक्त की ।
कमलेश मौर्य 'मृदु' जी ने अपनी रचनाओं से आतंकवाद और देश की वर्तमान स्थित पर जोरदार व्यंगात्मक प्रहार किए ।
उमाकान्त पांडे जी ने ''हमारे देश की सरहद को दुश्मन छू नहीं सकता, तिरंगा हाथ में है दिल में हिंदुस्तान जिन्दा है ।'' सुनाकर देश के हर नागरिक के देश के प्रति उद्गारों को आवाज दी ।
युवा रचनाकार संदीप अनुरागी ने 'अतना ज्यादा चोटान छोटे सब खाना पानी भूला है । भोरहे सीसा मा मुंह देखिन, तौ हनूमान कस फूला है ।।' पढ़कर सबको ठहाके लगाने पर विवश कर दिया ।
युवा कवि मनु बाजपेई 'बौछार' ने आत्मविश्वास की ताकत को स्वर देते हुए कहा- 'लाख दलदल थी जमीं पर, शान से चलता रहा ।'
सचिन मेहरोत्रा ने 'कहीं पे सर उठाकर जब निकलने लगते हैं' पंक्तियाँ पढ़कर खूब तालियाँ बटोरीं ।
मन्जुल मन्ज़र लखनवी जी ने 'मुईबाइल से सीखि सीखि कै ज्ञानी गुनी महान हुई गये ।' गीत को अपनी जादुई आवाज में सुनाकर शमा बाँध दिया और भरपूर तालियां बटोरीं ।
गौरव पांडे रूद्र ने अपनी गज़लों में आधुनिक समस्याओं पर बिम्बात्मक कटाक्ष किये ।
विपिन मलीहाबादी जी ने 'दिन तुम्हारे हुए रात मेरी हुई ' सुनाकर खूब वाहवाही प्राप्त की ।
सुन्दर लाल सुन्दर जी ने 'तुम अपने प्यार की गागर से कुछ बूंदे जो छलका दो, हम अपने प्यार का सागर बहाने तुमपे आये हैं ।' रचना पढ़ी तो श्रोता झूम उठे और वाह वाह और तालियों से सदन गूँज उठा ।
वरिष्ठ कवि डॉ० अशोक शर्मा जी ने 'एक दिवस केवल कविता के नाम लिखा जाये, एक दिवस सौंदर्य प्रेम के नाम लिखा जाये ।' पंक्तियों के माध्यम से कवि मन को जाग्रत करने का प्रयास किया ।
कुँवर कुसुमेश जी ने 'बहुत अच्छी इबारत लिख गया है, मुहब्बत ही मुहब्बत लिख गया है ।' जैसी उत्कृष्ट ग़जलो माध्यम से श्रोताओं को भरपूर रसपान कराया ।
मिज़ाज लखनवी ने 'किसी से भी दिल ये लगाने से पहले, जरा पूछ लेना जमाने से पहले ' सुनकर श्रोताओं को सोंचने पर विवश कर दिया ।
भारती अग्रवाल जी ने 'पत्थरो पर खड़ी मैं सोंचती हूँ ।' सुनाकर अपना जीवन के प्रति दार्शनिक द्रष्टिकोण प्रस्तुत किया ।
कार्यक्रम के संयोजक व संचालक राहुल द्विवेदी 'स्मित' ने ' जिन आँखों में बंजर दुनिया, उनकी खातिर पत्थर दुनिया ।' पंक्तियों को प्रवाह देते हुए गीत के माध्यम से मानवीय सम्वेदनाओं का दार्शनिक स्वरूप प्रस्तुत किया ।
इसके अतिरिक्त युवा कवि कृष्ण गोपाल शुक्ला, हास्य कवि अनिल बाँके ने भी काव्यपाठ कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की ।
कार्यक्रम के अंतर्गत श्री गौरी शंकर वैश्य 'विनम्र' जी की बाल कविताओं पर आधारित पुस्तको 'बाल विज्ञान कविताएं' और 'पर्यावरणीय बाल कविताएं' का विमोचन किया गया। रचनाकार विनम्र जी के अरिरिक्त डॉ. सी के मिश्र जी और ओम नीरव जी ने पुस्तकों की विशिष्टता और उपादेयता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ मिश्र ने 10 पुस्तकें विद्यालय-पुस्तकालय के लिए क्रय कीं।
प्रस्तुति : राहुल द्विवेदी 'स्मित'

रविवार, 9 जुलाई 2017

रामानुज त्रिपाठी सृजन संस्थान गरयें सुल्तानपुर द्वारा सम्मान समारोह,लोकार्पण एवं साहित्यिक संगोष्ठी-2017 का आयोजन

      पं. रामानुज त्रिपाठी सृजन संस्थान, गरएं,सुल्तानपुर,उप्र द्वारा कीर्तिशेष बालसाहित्यकार एवं गीतकार कवि रामानुज त्रिपाठी की 13वीं पुण्य तिथि पर 08 जुलाई 2017 को साहित्यकार सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण एवं विचार गोष्ठी का आयोजन जिला पंचायत सभागार, सुलतानपुर में किया गया| इस  अवसर पर देश प्रदेश के कई साहित्यकार भाग लिए | सम्पूर्ण कार्यक्रम दो सत्रों में विभाजित था जिसमें पहला सत्र बाल साहित्य पर और दूसरा सत्र  नवगीतों पर आधारित था| पहले सत्र में  रामानुज त्रिपाठी के बालगीत संग्रह "जंगल का स्कूल" और मासिक पत्रिका "बालवाटिका" के जुलाई अंक का लोकार्पण और दूसरे सत्र में आद धीरज श्रीवास्तव जी एवं आदरेया डॉ मंजु श्रीवास्तव जी द्वारा सम्पादित गीत-संकलन "नेह के महावर" और बाबूजी रामानुज त्रिपाठी के नवगीत संग्रह "धुंए की टहनियां" का लोकार्पण हुआ| दोनों सत्रों के विचार पक्ष को विभिन्न साहित्यकारों ने सम्बोधित किया| दोनों सत्रों का कुशल संचालन युवा आलोचक एवं समीक्षक साहित्यकार ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि जी ने किया।
प्रथम सत्र:-----------
संस्थान द्वारा आद0  डॉ.भैरूंलाल गर्ग, आद0 आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप जी, आद बन्धु कुशावर्ती जी, आद श्याम नारायण श्रीवास्तव जी एवं आद0 फतह सिंह लोढ़ा जी को बाल साहित्य सम्मान 2017 से सम्मानित किया।
        बाल साहित्य की वर्तमान प्रासंगकिता पर बोलते हुये वरिष्ठ बालकथाकार दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश का कहना था "आज हम बच्चों को शिक्षा देने और उसे प्रौढ़ बनाने के नाम पर अधिक से अधिक बोझ के नीचे दबा रहे हैं| यहाँ बच्चे बौद्धिक न होकर कुंठित होने लगते हैं| हमें बच्चों को इस कुंठा से बचाने के लिए बाल साहित्य से जोड़ना होगा| इसे स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि बाल साहित्य न के बराबर लिखे जा रहे हैं| घुमन्तू जातियों, दलितों और बंजारों पर तो लिखे ही नहीं जा रहें हैं| इसके लिए प्रत्येक प्रदेश सरकार को अपने अपने तरीके से प्रयत्न करना चाहिए| लखनऊ के आद बंधु कुशावर्ती का कहना था " रामानुज त्रिपाठी रामनरेश त्रिपाठी के बाद बाल साहित्य के इस जिले के बड़े महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे हैं|" डॉ० शोभनाथ शुक्ल जी ने त्रिपाठी जी के बाल साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा "बाल साहित्य पढ़ते हुए मुझे हमेशा लगता है कि दो प्रकार के उद्देश्य होने चाहिए जिसमें पहला-बच्चों का मनोरंज करना और दूसरा ज्ञान देते हुए बच्चों को सचेत करना| रामानुज त्रिपाठी के बाल साहित्य की बड़ी विशेषता रही है कि वे मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान देते हुए सचेत भी करती हैं|" मुख्य अतिथि के रूप में बालवाटिका पत्रिका के संपादक डॉ० भैरूं लाल गर्ग जी ने संस्मरण साझा करते हुए कहा "रामानुज त्रिपाठी के बाल साहित्य से परिचय बालवाटिका पत्रिका से ही संभव हो सका| उनकी चिट्ठियां बड़े आदरपूर्ण और सम्मान से सुन्दर हस्तलिखित प्रारूप में आती थीं| मैं सहसा देखकर यह विश्वास कर बैठता था की यह किसी मेहनती रचनाकार का खत है और उसे बड़े  मनोयोग से प्रकाशित करता था|" विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान के आद फतह सिंह लोढ़ा जी  ने कहा  "भारतवर्ष में अनेक लेखक थे,  हैं और  रहेंगे लेकिन पिता के साहित्य को आगे लाने वालों को उँगलियों पर गिना जा सकता है| रामानुज त्रिपाठी के साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने में अवनीश त्रिपाठी का बड़ा योगदान रहा है इसीलिए वे बधाई के पात्र हैं|"  प्रथम सत्र का अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ बाल एवं अवधी साहित्यकार आद्या प्रसाद सिंह 'प्रदीप' जी का कहना था कि "बाल साहित्य आज से नहीं आदि काल से रचा जा रहा है जिसे समृद्ध करने में रामानुज त्रिपाठी जी की बड़ी भूमिका रही है|"     
       द्वितीय सत्र:-------
आद ओम नीरव जी, डॉ सूर्यदीन यादव जी, आदरेया डॉ मंजु श्रीवास्तव जी, आदरणीय धीरज श्रीवास्तव जी को शॉल,पुष्पमाला एवं सम्मानपत्र देकर साहित्य सम्मान 2017 से सम्मानित किया गया।
    समीक्षक एवं आलोचक सुरेश चंद्र शर्मा ने बाबूजी रामानुज त्रिपाठी जी के नवगीतों में मानवीय संवेदना के पक्ष को रखते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला| चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के शोधार्थी समीक्षक अनिल पाण्डेय ने कहा - "नवगीतों में आत्मकथ्य और मानवीय संवेदनाएं तलाशनी हों तो कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है,बस रामानुज जी के गीत पढ़ें।" वरिष्ठ साहित्यकार डा.सुशील कुमार पांडेय जी का कहना था "पंडित रामानुज त्रिपाठी जी प्राचीन परम्पराओं के पथ पर अग्रसर हैं| उनके नवगीत कल के प्रतीक पर आज की सच्चाई है| इस सत्र के  मुख्य अतिथि कवितालोक लखनऊ के संस्थापक आदरणीय आचार्य ओम नीरव जी ने अपनी अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि "नवगीत और बाल कविता में  उनका स्वरुप अलग दिखता है| बच्चे  के अंदर प्रवेश करना परमहंस हो जाना है| पंडित जी इसके अनुकरणीय उदहारण हैं| यह कार्यक्रम एक पुत्र द्वारा पिता जी को श्रद्धांजलि ही नहीं समाज पर भी एक उपकार है|" द्वितीय सत्र में विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ.मंजू श्रीवास्तव रहीं और अध्यक्षता नाडियाड गुजरात के वरिष्ठ उपन्यासकार डॉ० सूर्यदीन यादव ने की| मंच का सञ्चालन युवा समीक्षक ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि और सरस्वती वंदना करुणेश भट्ट ने किया| कार्यक्रम  में दिव्या समिति के सचिव उत्कर्ष सिंह,आशुकवि आद मथुरा प्रसाद सिंह 'जटायु' , डॉ० रामप्यारे प्रजापति, जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव, डॉ० देवनारायण शर्मा, उमाशंकर शुक्ल जी, उमाकांत पांडेय जी, डॉ० ओंकार नाथ द्विवेदी,जयंत त्रिपाठी, संदीप सिंह,डॉ० लक्ष्मण गाँधी, सुधा त्रिपाठी, वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी जी,प्रीति तिवारी,प्रशंसा शुक्ला,रचना शुक्ला,हेमन्त कुमार किरण,दिलीप सिंह,ओम प्रकाश सिंह,देवेंद्र प्रसाद सिंह आदि प्रमुख रुप से  उपस्थित रहे|
आभार ज्ञापन आयोजक के रूप में अवनीश त्रिपाठी ने किया ।

गुरुवार, 30 मार्च 2017

कवितालोक द्विशतकीय महाकुम्भ लखनऊ

कार्यक्रम दिनाँक:- 26/03/2017 समय-10.00AM
      हिंदी छन्द साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी 'कवितालोक सृजन संस्थान' द्वारा कवितालोक द्विशतकीय सारस्वत महाकुम्भ का आयोजन संस्था के संरक्षक आचार्य 'ओम नीरव' के  संरक्षण में सभागार डिप्लोमा इंजीनीर्स संघ, है, हजरतगंज, लखनऊ में किया गया ।
जिसमें देश के कोने कोने से 100 साहित्यकार एवं कवि सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यमर्मज्ञ डॉ. अनिल मिश्र जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. उषा सिन्हा जी, पूर्व विभागाध्यक्ष भाषा विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने की और संयोजन सम्मिलित रूप से सुनील त्रिपाठी जी, मनोज मानव जी, उमाकान्त पाण्डेयजी, अवनीश त्रिपाठी और गीतों के राजकुमार आद धीरज श्रीवास्तव जी ने किया ।
   प्रथम सत्र में हिंदी साहित्य की विशिष्ट काव्य कृति साझा कुण्डलिनी संकलन ''कुण्डलिनी लोक'' का लोकार्पण डॉ. उषा सिन्हा जी, डॉ. अनिल मिश्र जी, डॉ. साधना जोशी प्रधान जी, डॉ मँजू श्रीवास्तव जी , डॉ. छाया शुक्ला जी,डॉ.राजेश कुमारी जी, डॉ पंकज भारद्वाज जी, सत्यदेव द्विवेदी 'पथिक' जी, शिवभजन कमलेश जी, छंदाचार्य रामदेव लाल 'विभोर' जी, नवगीतकार मधुकर अस्थाना जी एवं आचार्य ओम नीरव जी के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ. उषा सिन्हा और दूर दूर से आये हुए सभी साहित्यकारों को संस्थापक आद. ओम नीरव जी ने अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, एवं 'कुण्डलिनी लोक' की प्रति प्रदान कर सम्मानित किया।लोकार्पित 'कुण्डलिनी लोक' संकलन पर विभिन्न समीक्षकों द्वारा वक्तव्य दिया गया।
          द्वितीय सत्र में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 80 से अधिक कवियों ने काव्यपाठ कर काव्य की रसधार से श्रोताओं को सराबोर कर दिया।हास्य व्यंग के राष्ट्रीय कवि 'यश भारती' पुरस्कार से सम्मानित श्री सर्वेश अस्थाना जी ने अपनी विधा से हटकर एक गीत प्रस्तुत किया 'तुमने पत्र जलाया होगा'।
ओज कवि उमाकान्त पांडेय जी ने पढ़ा-
'अन्न जल जिसने छुआ है भारती का उसे,
कहना पड़ेगा बार बार वंदेमातरम।'
दिनेश कुशभुवनपुरी जी की इन पंक्तियों पर खूब तालियाँ बजीं-
'समय आ गया आगे बढ़कर,
काम करें हम सब अब मिलकर
कर्म योग मोदी सँग करके
योगी बनने का अवसर है ।'
कार्यक्रम के संयोजक सुनील त्रिपाठी जी ने आद नीरव जी के सम्मान में ये पंक्तियाँ पढ़ीं
'मनाया द्विशतकीय कुम्भ है इस बार नीरव जी,
जुटा सम्पूर्ण कवितालोक का परिवार नीरव जी।'
लखीमपुर से आये कन्हैया लखीमपुरी ने-
'पप्पू को सौ भारी लगते अम्मा की दवाई पर,
पूरी जेब लुटा दी मुन्नी बाई की अँगड़ाई पर।'
गीतों के राजकुमार 'धीरज श्रीवास्तव' जी ने सुनाया
'साँझ जब आँसू बहाये बैठ दिल के इस पार पर,
क्या भरोसा भोर का फिर क्या तुम्हारे प्यार पर।'
हिंदी संस्थान के पुरस्कृत कवि'कुमार तरल' जी ने सुनाया
'आन बान शान पे किये जो कुर्बानी जान,
ध्यान में शहीदों की शहादत बनी रहे।'
बाराबंकी से आये डॉ. शर्मेश शर्मा ने पढ़ा-
'जमाना लाख हो दुश्मन हमारा कुछ न बिगड़ेगा, मैं अपने बाप- माँ- गुरु की दुआएँ ले के चलता हूँ।'
बिजनौर से आये गीतिकाकार मनोज मानव जी ने पढ़ा -
'खुल कर सत्य बयानी लिख दे,
कुछ भी लिख तूफानी लिख दे।'
जयपुर से पधारी ' डॉ.साधना प्रधान जी ने सुनाया-
'हार जाए संकटों से वह मनुज होता नहीं,
है वही मानव खरा जोधैर्य को खोता नहीं।'
मंजुल मंज़र लखनवी की पंक्तियाँ थी -
'चलो इस भारती माँ के सपूतों को नमन कर लें,
लुटा दें जान वतन पर ऐसे लोगों को नमन कर लें'
सौरभ टण्डन'शशि' के बसन्त गीत-
'गीत  में  उद्गार  झलके राग में  ढलने  लगे
रुत बसन्ती आ गयी है सुर नये सजने लगे ।।'
पर सारे श्रोतागण झूम उठे.
मऊ से मिलन चौरसिया'मिलन' जी अपनी ग़ज़ल-'केशव मुस्काये तो मैं क्या करूँ' सुनाकर सभी का मन जीत लिया
अन्त में आचार्य 'ओम नीरव' जी ने आये हुए सम्मानित कवियों का आभार व्यक्त किया और अपने काव्य पाठ में यह छन्द पढ़े-
'माटी का हो घट या हो स्वर्ण का कलश भव्य,
मदिरा के पात्र से दुर्गन्ध ही तो आयेगी।
शब्द के तलाव में डुबाओ जितना भी चाहे
झूठ की किताब शव तुल्य उतरायेगी।
अनुबंध चुनरी के प्रेम तार टांकने में
द्वेष ग्रंथि आयी तो बुनाई उलझायेगी
द्वेष की दीवार हो विशाल चाहे जितनी भी,
प्रेम के आकाश से तो नीची रह जायेगी ।।'
'नीरव जी' की इन पंक्तियों को श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया ।।

सम्मानित कवि एवं साहित्य प्रेमी तथा उन्हें प्राप्त सम्मान:-------

द्विशतकीय महाकुंभ सूची (सम्मानों के क्रम में ) 
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1 तिलक जैन (कुण्डलिनी रत्न) संरक्षक, काव्य गूँज, हिसार, हरियाणा 
2 मनोज मानव (कुण्डलिनी रत्न) सहसंचालक, कवितालोक सृजन संस्थान, लखनऊ
3 अवनीश त्रिपाठी (कुण्डलिनी रत्न) संस्थापक अध्यक्ष, पं. रामानुज त्रिपाठी सृजन संस्थान, गरयें,सुल्तानपुर, उ.प्र.
4 धीरज श्रीवास्तव (कुण्डलिनी रत्न) >संस्थापक सचिव, साहित्य प्रोत्साहन संस्थान, मनकापुर, गोंडा
5 सूक्ष्म लता महाजन (कुण्डलिनी रत्न) >कार्यकारिणी सदस्य, दिल्ली पोइट्री सर्कल, दिल्ली
6  डॉ. मंजु श्रीवास्तव (कुण्डलिनी रत्न) >सदस्य, साहित्यिक संस्था ‘तरंग’, कानपुर
7 डॉ बिपिन पाण्डेय (कुण्डलिनी रत्न)
सीतापुर, उत्तर प्रदेश
8 प्रमोद तिवारी ‘हंस’ (कुण्डलिनी रत्न) भरथना, इटावा, उ.प्र. 
9 छाया शुक्ला ‘छाया’ (कुण्डलिनी रत्न) >वाराणसी, उत्तर प्रदेश
10 डॉ. साधना जोशी प्रधान (कुण्डलिनी रत्न) > परामर्शदात्री, राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान, जयपुर
11 अनिल कुमार पाण्डेय (कुण्डलिनी रत्न) >अध्यक्ष, साहित्य प्रोत्साहन संस्थान, मनकापुर, गोण्डा (उ.प्र)
12उमा शंकर शुक्ल ‘आलोक’ (कुण्डलिनी रत्न) > अध्यक्ष, प्रगतिशील लेखक संघ, गोण्डा (उ0प्र0 )
13 दिनेश कुशभुवनपुरी (कुण्डलिनी रत्न) >सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश
14कन्हैया लखीमपुरी (कुण्डलिनी रत्न) सेमरिया, लखीमपुर, खीरी, उत्तर प्रदेश 
15 छाया त्रिपाठी ओझा (कुण्डलिनी रत्न) >फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
16 दीपक गोस्वामी ‘चिराग’ (कुण्डलिनी रत्न) > संस्थापक अध्यक्ष, सृजन साहित्यिक अभिरूचि मंच, बहजोई , उत्तर प्रदेश
17 प्रद्युम्न चतुर्वेदी (कुण्डलिनी रत्न) सिवनी, मध्यप्रदेश
18 पारसनाथ श्रीवास्तव (कुण्डलिनी रत्न) >संरक्षक, साहित्य प्रोत्साहन संस्थान, मनकापुर, गोण्डा (उ.प्र.)
19 ईश्वर चन्द्र मेंहदावली (कुण्डलिनी रत्न) >मेंहदावल, संतकबीर नगर, उत्तर प्रदेश 
20 मिलन चौरसिया ‘मिलन’ (कुण्डलिनी रत्न) मुहम्मदाबाद सिपाह-मऊ, उत्तर प्रदेश
21 सुनील कुमार त्रिपाठी (कुण्डलिनी रत्न) सहसंचालक, कवितालोक सृजन संस्थान, लखनऊ
22 उमा कान्त पाण्डेय (कुण्डलिनी रत्न) सहसंचालक, कवितालोक सृजन संस्थान, लखनऊ
23 हरीश चन्द्र लोहुमी (कुण्डलिनी रत्न) विकास नगर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
24 श्याम फतनपुरी (कुण्डलिनी रत्न) गोमती नगर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
25 कुमार तरल (कुण्डलिनी रत्न) उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, लखनऊ
26 सौरभ टंडन ‘शशि’ (कुण्डलिनी रत्न) अलीगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
27 मंजुल मंज़र लखनवी (कुण्डलिनी रत्न) सदस्य, संस्कार भारती, लखनऊ

काव्य रत्न सम्मान
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28हेमन्त कुमार 'कीर्ण' (काव्य रत्न) मंत्री, चंद्रप्रभा साहित्यिक मंच, चकिया, चंदौली, उत्तर प्रदेश 
29 अशोक व्यग्र (काव्य रत्न) भोपाल, मध्य प्रदेश
30 दानिश जयपुरी (काव्य रत्न) भोपाल, मध्य प्रदेश
3 राजेश्वर राय (काव्य रत्न) > संपादक, दैनिक समाचार पत्र ‘ट्रू टाइम्स’, दिल्ली 
32 शुभदा वाजपेयी (काव्य रत्न) > सदस्य, वाणी साहित्यिक संस्था, कानपुर
33 डॉ. देवनारायण शर्मा (काव्य रत्न) >रानीपुर कायस्थ, सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश
34 शिवानन्द सिंह 'सहयोगी' (काव्य रत्न) गंगानगर, मेरठ,  उत्तर प्रदेश
35 केशर बख्श सिंह (काव्य रत्न) नरायनपुर, रायबरेली , उत्तर प्रदेश
36 विजय नारायण सिंह ‘बेरुका’(काव्य रत्न) प्रचार सचिव, साहित्यिक मंच ‘हुलास’, जमशेदपुर, उत्तर प्रदेश
37 डॉ प्रदीप कुमार चित्रांशी (काव्य रत्न) >अध्यक्ष, साहित्यांजलि प्रज्योदि सामाजिक साहित्यिक एवं सास्कृतिक संस्था, इलाहाबाद
38अनुपम आलोक (काव्य रत्न) बाँगरमऊ, उन्नाव, उत्तर प्रदेश
39मुसाफ़िर व्यास (काव्य रत्न) खातेगांव , भोपाल, म.प्र.
40 कुन्दन कुमार उपाध्याय (काव्य रत्न)प्रचारक, साहित्य प्रोत्साहन संस्थान, मनकापुर, गोंडा, उत्तर प्रदेश
41डॉ. अशोक गौतम (काव्य रत्न) अध्यक्ष, अखिल भारतीय शिखर साहित्य संगम, भोपाल, मध्य प्रदेश
42 सत्यवीर सिंह 'उजाला' (काव्य रत्न) > संगठन मंत्री, सृजन साहित्यिक अभिरूचि मंच, बहजोई , उत्तर प्रदेश
43 राजेश कुमारी 'राज' (काव्य रत्न) >देहरादून, उत्तराखंड
44 विद्या भूषण मिश्र ‘ज़फ़र’ (काव्य रत्न) देवरिया, उत्तर प्रदेश
45राम लखन वर्मा (काव्य रत्न) >मनकापुर, गोंडा, उत्तर प्रदेश
46राघवेंद्र चिंगारी (काव्य रत्न) कौंच, जालौन, उत्तर प्रदेश
47डॉ. कैलाश नाथ मिश्र (काव्य रत्न) >फतनपुर, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
48 अशोक कुमार पाण्डेय ‘अशोक’ (काव्य रत्न) अध्यक्ष, सर्वजन हिताय साहित्यिक समिति, लखनऊ
49 रामदेव लाल विभोर (काव्य रत्न) संस्थापक, काव्य कला संगम, लखनऊ
50 डॉ. अजय प्रसून (काव्य रत्न) अध्यक्ष, अखिल भारतीय अनागत साहित्य संस्थान, लखनऊ
51 सर्वेश अस्थाना, लखनऊ (काव्य रत्न) संपादक- मासिक पत्र ‘साहित्यगंधा’
52 डॉ. शिव भजन ‘कमलेश’ (काव्य रत्न) संरक्षक, प्रतिष्ठा प्रतिष्ठा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, आलमबाग, लखनऊ
53मधुकर अष्ठाना (काव्य रत्न) संयोजक संस्थापक, अखिल भारतीय प्रगतिशील गीतकार मंच, लखनऊ
54 कृष्णा अवस्थी (काव्य रत्न) अध्यक्ष, प्रतिष्ठा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, आलमबाग, लखनऊ
55डॉ. उमेश चंद्र श्रीवास्तव (काव्य रत्न) सदस्य, युवा रचनाकार मंच, लखनऊ 
56 अजय प्रधान (काव्य रत्न) सक्रिय सदस्य, साहित्य साधना संस्थान बाराबंकी, उ.प्र
57 निवेदिता श्रीवास्तव (काव्य रत्न) संस्थापक अध्यक्ष, काव्या सतत साहित्य यात्रा, लखनऊ
58 मिज़ाज लखनवी (काव्य रत्न) अध्यक्ष, आम्रपाली दर्पण, लखनऊ
59 योगेश चौहान (काव्य रत्न) महासचिव, अवध भारतीय सेवा समिति, लखनऊ
60 विपिन मलिहाबादी (काव्य रत्न) प्रांतीय अध्यक्ष, भारतीय साहित्य उत्थान समिति, लखनऊ
61डॉ. कैलाश निगम (काव्य रत्न) संस्थापक, प्रतिष्ठा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, आलमबाग, लखनऊ
62मुकेश कुमार मिश्र (काव्य रत्न) लखनऊ, उत्तर प्रदेश
63डॉ. सत्यदेव प्रसाद द्विवेदी ‘पथिक’ (काव्य रत्न) महामंत्री, प्रतिष्ठा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, आलमबाग, लखनऊ
64 सुंदर लाल ‘सुंदर’ (काव्य रत्न) सदस्य, संस्कार भारती, लखनऊ
65 राजेंद्र कुमार शुक्ल ‘राज’ (काव्य रत्न) संस्थापक संयोजक, सर्वजन हिताय साहित्यिक समिति, लखनऊ
66अशोक शुक्ल ‘अनजान’ (काव्य रत्न) कोषाध्यक्ष, प्रीति नगर साहित्यिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परिषद, लखनऊ 
67 ओम प्रकाश ‘मधुर’ (काव्य रत्न) अध्यक्ष, गंगो-जमुन साहियिक संस्था, डिबाई, दिल्ली
68 प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा (काव्य रत्न) संस्थापक सचिव, विमला देवी सुघर सिंह कुशवाह फ़ाउंडेशन, लखनऊ
69मृत्युंजय प्रसाद गुप्ता (काव्य रत्न) संपादक, विश्वविधायक साप्ताहिक, लखनऊ
70 चेतराम अज्ञानी (काव्य रत्न) संस्थापक अध्यक्ष, हिन्दी साहित्यिक मंच, भौली, लखनऊ
71डॉ. शर्मेश शर्मा (काव्य रत्न) रानीगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
72 केवल प्रसाद ‘सत्यम’ (काव्य रत्न) गोमतीनगर विस्तार, लखनऊ
73 संजय सांवरा (काव्य रत्न) जजियामऊ, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
74 संदीप अनुरागी (काव्य रत्न) अमावा, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
75 आभा मिश्रा (काव्य रत्न) अध्यक्ष, महिला उत्थान समिति, सआदत गंज, लखनऊ
76 हरि प्रसाद मिश्र ‘असीम’ (काव्य रत्न) संयोजक, महिला उत्थान मंच, लखनऊ
77 पंडित अशोक दीक्षित (काव्य रत्न) कलेक्टर गंज, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश 
78 गौरीशंकर वैश्य ‘विनम्र’ (काव्य रत्न) विकासनगर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

साहित्य शिरोमणि
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79 प्रो. (डॉ) उषा सिन्हा , लखनऊ (साहित्य शिरोमणि) पूर्व अध्यक्ष, भाषाविज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
80 डॉ अनिल मिश्र, लखनऊ (साहित्य शिरोमणि) सम्पादन समिति, नव परिमल 

साहित्य सुधाकर
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81 डा. पंकज भारद्वाज (साहित्य सुधाकर) > संपादक, पब्लिक इमोशन सांध्य दैनिक, बिजनौर, उत्तर प्रदेश
82 रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव (साहित्य सुधाकर) > सदस्य, प्रबंध समिति, जूनियर इंजीनियर संघ, गाजीपुर, उ. प्र.
83 डॉ सुभाष चन्द्र (साहित्य सुधाकर) सुभांजलि प्रकाशन, कानपुर
84 डॉ चन्द्र कुमार मिश्र (साहित्य सुधाकर) संस्थापक प्रबन्धक, चन्द्रवाटिका शिक्षा निकेतन, महोना, लखनऊ
85 अमिताभ त्रिवेदी (साहित्य सुधाकर) संपादक, युगवार्ता, लखनऊ
86 डॉ. सनत त्रिवेदी (साहित्य सुधाकर) पूर्व प्रवक्ता, लखनऊ