सोमवार, 25 अप्रैल 2016

'गीतिकालोक'-- गागर में सागर

DrArchana Gupta , मुरादाबाद , उत्तर प्रदेश 

           गीतिका संकलन 'गीतिकलोक' मिला ।पुस्तक के पृष्ठ पलटते पलटते जो भाव मन में आ रहे थे वो आपसे यहाँ बाँटना चाहती हूँ । पुस्तक हाथ में आते ही सोचा सबसे पहले देखूं मेरी रचना कहाँ हैं । लेकिन पुस्तक खोलते ही उस पुस्तक में दी गयी अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियों में खो सी गयी । छंदों की जानकारी मापनी और उदाहरण सहित इतने सरल तरीके से दी गयी है की उसी को पढ़ती रह गयी । नवोदितो के लिए तो पूरी पाठशाला ही है ये
            गागर में सागर भर दिया गया है जैसे । उसके बाद शुरू हुई गीतिकाएं और मुक्तक । वक़्त लगेगा सभी रचनाओं का आनंद लेने में । लेकिन जितना भी पढ़ सकी हूँ मुझे लग रहा है जैसे कोई खज़ाना मेरे हाथ लग गया हो । सभी गीतिकाओं को मापनी छंद समांत पदांत सहित दिया गया है । कितनी मेहनत आद ओम नीरव जी सर ने इसमें की है देख कर हैरत में हूँ ।
             इतने श्रेष्ठ रचनाकारों के बीच में अपने जैसे अल्पज्ञ की रचना को भी देखकर मन प्रफुल्लित हो गया । अपनी दो गीतिकाओं और एक मुक्तक द्वारा इस पुस्तक का अंग बनकर खुद को बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ । ह्रदय की गहराइयों से आदरणीय Om Neerav जी आपका आभार और नमन मेरी रचनाओं को इसमें स्थान देने के लिए ।

                 DrArchana Gupta , मुरादाबाद , उत्तर प्रदेश