मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

साहित्यिक अभिरुचि का संवर्द्धक-'गीतिकालोक'

समीक्ष्य कृति – गीतिकालोक, कृतिकार – ओम नीरव 
(पृष्ठ – 280, पेपर कवर, मूल्य – 300 रूपये, संपर्क – 07526063802) 

समीक्षक-- Uddhav Deoli 

सम्मानित मित्रो नमस्कार।
          *गीतिकालोक* की प्रतियाँ प्राप्त हुयी | अति प्रसन्नता का आभास हुआ| यह ग्रन्थ कवितालोक के संस्थापक एवं मार्गदर्शक परम आदरणीय Om Neerav जी की मेहनत व शोध का फल है| हिन्दी भाषा के उत्थान के लिए गुरुदेव सदा ही प्रयत्नशील रहे हैं,इसी कड़ी में यह ग्रन्थ हमारे हाथों में है| गीतिका का जन्म नीरव जी के ही गुरुकुल में हुआ है|हमनें देखा कि लगातार हम जैसे सीखनें वालों को गुरुदेव अपनी टिप्पणियों के माध्यम से हमें समझाते रहे हैं|आज उसी का परिणाम है कि हम दो शब्द लिख पा रहे हैं|यह पुस्तक हमारे लिए वरदान स्वरूप है|

१-- पुस्तक में *अपनी बात* में ही गुरुदेव ने हिन्दी भाषा की विशिष्टता,इसकी मिठास ,लोकप्रियता व सहित्य के संम्बंध में भरपूर प्रकाश डाला है|

२--पुस्तक के भाग-१ में वे सभी अध्याय प्रदान किये गए हैं जो कि साहित्यकारों केलिए आवश्यक होते हैं| ऐसी पुस्तकें मिलनी कठिन होती हैं तथा इन्हें पानें के लिए साहित्यकार/ रचनाकार /काव्यसृजन करनेंवालों को जगह-जगह घूमना पड़ता है परन्तु उन्हें वांछित पुस्तक प्राप्त नहीं होती है| आज नवोदित साहित्यकार/छात्र/शोधार्थी इस पुस्तक से भरपूर लाभ उठा सकते हैं| 

३-इस ग्रन्थ के भाग-२ में ८७ साहित्यकारों/गीतिककारों की १६१ गीतिकाओं का संकलन शिल्प सहित उदारहण/सन्दर्भ हेतु दिया गया हैजोकि गुरुदेव व कवितालोक के असंख्य साहित्यकारों के द्वारा अपनी बहुमूल्य टिप्पणियों से संम्पादित हैं|इन गीतिकाओं में प्रकृति,आध्यात्म,भौतिक ,समसामयिक तथा सभी रसों की रचनाओं को आपको सीखनें व रसास्वादन करनें का अवसर मिलेगा| 
              अंत में ,मैं यही कहना चाहूँगा कि यह ग्रन्थ विद्यार्थियों/ नवोदित साहित्यकारों/ शोधार्थियों/अध्यापक वर्ग/ साहित्य में रूचि रखनें वालों को वरदान स्वरूप है|
इति शुभम्!😊

उद्धव देवली, कर्णप्रयाग, उत्तराखण्ड