रविवार, 27 नवंबर 2016

कवितालोक - जयपुर की द्वितीय मासिक काव्यशाला संपन्न


कवितालोक
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       जयपुर की द्वितीय-काव्यशाला का आयोजन संस्था के संस्थापक ओम नीरव जी के संरक्षण और वरिष्ठ सदस्य और चतुष्पदी समारोह के संचालक श्री लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी के संयोजन में गंगोत्री नगर,गोपालपुरा,जयपुर स्थित उनके निवास पर श्री आर.सी.शर्मा गोपाल जी की अध्यक्षता  में संपन्न हुआ |
   गोष्ठी में डॉ. बजरंग सोनी ने प्राकृति के प्रतीकों का प्रयोग कर सुंदर भाव बिम्ब उकेरे - “प्यार हो ही जाता है पहाड़ को फिजाओं से, पेड़ को हवाओं से' और फिर अजन्मी कन्याओं को शब्दायित करती मार्मिक रचना सुनाई जिससे कई आँखें नाम हो गईं।
     आर.सी. शर्मा गोपाल जी ने देश की समकालीन परिस्थितियों पर रचनाएँ सुनाकर श्रीताओं को मंत्रमुग्ध कर लिया, उनका प्रशंसित दोहा-
बहुत कहा संतोष रख, छोड़ों संचय भाव,
डूबीं अपने बोझ से,जिनकी भारी नाव।
       सुशील सरना जी ने राष्ट्रीय एकता हा संदेश कुछ इसप्रकार व्यंजित किया-
जमी से ज़रा राख उठाकर बताओ,
ये हिन्दू है या मुसलमान बताओ।
    सुरेश गोस्वामी 'सुरेशजी' जी ने भाव भरे दोहे सुनाकर खूब तालियाँ प्राप्त कीं -
सभी देव, तीरथ धरम, पुण्य, तपस्या दान,
मिल जाएं होता जहाँ नारी का सम्मान” |
मौन साधना है पिता, सतत करे संघर्ष,
अनुशासन पुरुषार्थ से, परिजन को दे हर्ष |
      कवयित्री शिवानी शर्मा जी ने हृदय की भाषा में रचना सुनाई तो श्रोता वाह-वाह कर उठे-
मेरी दीवानगी उनको हद से ज्यादा खलती है,
नफरतें ही नफरतें जिनके दिल में पल में पलती है।
     चन्द्र प्रकाश पारीक जी ने समाज को दर्पण दिखाते हुए सुनाया -
जीने का सामान बहुत है,
इंसान भी शैतान बहुत है।
     संयोजक लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला ने चांदों की छट बिखेरते हुए इन पंक्तियों पर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की -
परेशान जनता को करते, षड्यंत्रों का बुनते जाल,
काले धन से भरा खजाना, आज बना जी का जंजाल।
और फिर गीतिका सुनाई तो श्रोता युग्म प्रति युग्म पर वाह-वाह करने के लिए विवश हो गए-
चौराहे पर खड़ी जिन्दगी, मुश्किल है समझाना,
निर्जन वन को दीन निहारें, खाली हुआ खजाना |
हो जाती जब शाम जिन्दगी, दूर तभी तब अपने,
कठिन डगर सी लगें जिन्दगी, मुश्किल वक्त बिताना।
रतन राठौड़ जी ने भावभरी रचना सुनाकर श्रोताओं का हृदय जीत लिया-
बन्द आँखों से रिझाना आ गया, लो हमें अब मुस्कुराना आ गया।
इनके अतिरिक्त आलोक चतुर्वेदी जी सहित सभी कवियों के सरस काव्य पाठ के साथ काव्यशाला में कोई चार घंटे तक गीत गीतिका, छंद, मुक्तक आदि का रसास्वादन होता रहा।       
            इसी बीच कवितालोक के संस्थापक श्रद्धेय ओम नीरव जी ने लखनऊ से लड़ीवाला जी के मोबाइल पर सभी आगंतुक कवियों को अपना शुभ कामना सन्देश दिया और खेद व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी भाभी का निधन को जाने के कारण वे नहीं पहुँच सके। सभी ने उनकी भाभी के आकस्मिक निधन पर दुख जताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आर.सी. शर्मा गोपाल जी, अलोक चतुर्वेदी जी और रतन राठोड जी को लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला के प्रथम काव्य संग्रह "करते शब्द प्रहार" की प्रतियाँ भेंट की गईं। अंत में संयोजक लड़ीवाला जी ने गोष्ठी को सफल बनाने के लिए उपस्थित सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया और कवितालोक कार्यशाला के भावी आयोजनों को अधिकाधिक उपस्थिति से सफल बनाने का आह्वान किया।

प्रस्तुति :---
लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला