गुरुवार, 15 सितंबर 2016

"कवितालोक सृजन संस्थान लखनऊ" ने हिंदी दिवस पर दिया साहित्यकारों को सम्मान

कवितालोक का 'हिन्दी दिवस समारोह'
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कवितालोक सृजन संस्थान के तत्वावधान में 'हिंदी दिवस समारोह' का आयोजन महोना के चन्द्र वाटिका शिक्षा निकेतन के सभागार में व्यवस्थापक डॉ० सी.के. मिश्र के सौजन्य से संस्थान के संरक्षक ओम नीरव के संरक्षण में किया गया। आयोजन की अध्यक्षता कविश्रेष्ठ डॉ अजय प्रसून जी ने की और संयोजन-संचालन युवा कवि राहुल द्विवेदी स्मित ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में सुकवि कुँवर कुसमेश उपस्थित रहे। काव्यशाला का प्रारम्भ शिखर अवस्थी की सुमधुर वाणी वंदना से हुआ । इस अवसर पर कॉलेज के दसवीं कक्षा के छात्र सूरज कुमार और अध्यापिका सुंदरम पांडेय ने हिंदी दिवस के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किये । हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में कवितालोक सृजन संस्थान के संरक्षक ओम नीरव द्वारा चन्द्र वाटिका शिक्षा संस्थान के व्यवस्थापक डॉ० चन्द्र कुमार मिश्र, समारोह अध्यक्ष अजय प्रसून, मुख्य अतिथि कुँवर कुसमेश, संयोजक संचालक राहुल द्विवेदी 'स्मित', कॉलेज के प्रधानाचार्य अजय कुमार वर्मा, अध्यापक अखिलेश वर्मा, अध्यापिका सुंदरम पांडेय और कार्यक्रम में पधारे सभी कवियों को उनके हिंदी साहित्य के उत्थान में विशिष्ट योगदान के लिए 'हिंदी रत्न’ सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया । कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों ने अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति के आधार पर मंचासीन अतिथि और विशेषज्ञों से हिन्दी-कविता के सन्दर्भ में अपने प्रश्न पूछे और मंच से उनके सटीक और रोचक उत्तर दिये गए। प्रश्न पूछने वाले बच्चों में दसवीं कक्षा के छात्र अनुराग यादव ने बोली और भाषा के अंतर को जानने की जिज्ञासा की, नवीं की छात्रा बुशरा फातिमा ने पूछा ‘लिपि क्या है’ और आठवीं के शिवांश शुक्ल ने फ़िल्मी गानों और साहित्यिक गीतों के मूल अंतर को जानना चाहा। इस अवसर पर कार्यक्रम में अपना योगदान देने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया जिनमे बुसरा फातिमा, सूरज कुमार, शिवांश शुक्ला व अनुराग यादव प्रमुख रहे । इस अवसर पर काव्य पाठ की कुछ झलकियाँ -
डॉ. अजय प्रसून जी -
'हिंदी भाषा अमर रहेगी, जगती तल में युगों युगों तक ।
यह जनवाणी मुखर रहेगी, हिंदी भाषा युगों युगों तक ।।'
कुंवर कुसमेश जी -
'एक ऊँची उड़ान हिंदी है ।
हिंदी की आन-बान हिंदी है ।।'
गौरव पाण्डे जी -
'उजाला माँ के चेहरे का न होता साथ जो मेरे,
सफर में दूर तक फैली हुई बस तीरगी होती ।'
नीलम भारती जी -
'मेरे टूटे हुए सपनों की तुम इक आस जैसे हो,
मेरी अनुभूति, मेरी प्रेरणा, विश्वास जैसे हो ।'
मुकेश कुमार मिश्र जी -
' माँ भारती ने पुकारा कभी तो
सदा क्रांति धारा इसी से बही है । '
मन्जुल मन्ज़र लखनवी जी - '
आग नफरत की यहाँ और जलेगी कब तक ?'
विपिन मलीहाबादी जी -
'जिंदगी भर का भरोसा तोड़ दो,
दिल लगा कर तुम छिपाना छोड़ दो ।'
सम्पत्ति कुमार मिश्र 'भ्रमर वैसवारी' जी -
'विकृति से दूर-दूर संस्कृति सुदेवन की,
देव नागरी तो बनी आज महारानी है ।'
शिखर अवस्थी जी
'मिलेगी कामयाबी यदि करें संघर्ष सब मिलकर ।'
कवियत्री विभा सिंह जी -
'डाल-डाल पर गा रही, कोयल सुंदर गीत ।
तन-मन भीगा देखकर, इस वसुधा की प्रीत ।।'
दिनेश अवस्थी जी -
'परस्पर रहा नही विस्वास,
मिलन के निष्फल हुए प्रयास । वार्ता कैसे हो श्रीमान ?'
योगेश पांडेय जी -
'आशुतोष सेवक हूँ बस यहीं जानता मैं,
प्राण में भी आप हैं प्रयाण में भी आप हैं ।'
राजाभैया गुप्ता 'राजाभ्' जी -
'अब की हिंदी दिवस में , ले नूतन संकल्प ।
निज भाषा उत्थान हित, खोजें नये विकल्प ।।'
अशोक शुक्ल अंजान जी -
'पूरी दुनिया में मात्र एक ऐसी भाषा है हिंदी ।'
महेश प्रकाश अष्ठाना 'प्रकाश'जी -
'हिंदी सहज अभिव्यक्त करते हमारे भाव ।'
प्रेम शंकर शास्त्री 'बेताब' जी -
'स्वरों से हो मुखर हिंदी जेहन में जान भर देती ।'
साहब दीन 'दीन' जी -
'भाषा हमारी हिंदी समर्थ, है शब्द कोष उन्नत भारी ।'
सीमा मधुरिमा जी -
'धरती के प्यार से आयी हूँ जान लो ।
तहजीब से मांगो तो सारा जहान लो ।।'
अखिल कुमार श्रीवास्तव 'व्यथित' जी -
'बिछ जायेगी चौसर भी न गोटियाँ होंगी ।
वक्त ऐसा आएगा न रोटियाँ होंगी ।।'
योगेश चौहान जी -
'एक सीस के बदले सौ नर मुंड हमे हर साल चाहिए ।
मन में उपजे प्रश्नों का उत्तर मुझको तत्काल चाहिए ।।'
राहुल द्विवेदी 'स्मित' -
' तिनका-तिनका बिखर रहा है यह प्यारा संसार ।
जाने किसने बना दिया है रिश्तों को ब्यापार ।।'
ओम नीरव -
जो अपने लिए चाहते हो वह औरों से भी व्यवहार करो जी।
हिन्दी को प्यार मिले सबका, सबकी यदि भाषा से प्यार करो जी।
काव्य पाठ करने वाले अन्य अवि थे - आशुतोष तिवारी जी, माधवी मिश्रा जी।
दोपहर 1 बजे से लगातार पाँच घंटे चलाने वाला यह हिन्दी दिवस समारोह आयोजन-प्रमुख डॉ चन्द्र कुमार मिश्र के धन्यवाद-ज्ञापन के साथ समाप्त हुआ।

"कवितालोक सृजन संस्थान लखनऊ" ने हिंदी दिवस पर दिया साहित्यकारों को सम्मान

कवितालोक का 'हिन्दी दिवस समारोह'
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कवितालोक सृजन संस्थान के तत्वावधान में 'हिंदी दिवस समारोह' का आयोजन महोना के चन्द्र वाटिका शिक्षा निकेतन के सभागार में व्यवस्थापक डॉ० सी.के. मिश्र के सौजन्य से संस्थान के संरक्षक ओम नीरव के संरक्षण में किया गया। आयोजन की अध्यक्षता कविश्रेष्ठ डॉ अजय प्रसून जी ने की और संयोजन-संचालन युवा कवि राहुल द्विवेदी स्मित ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में सुकवि कुँवर कुसमेश उपस्थित रहे। काव्यशाला का प्रारम्भ शिखर अवस्थी की सुमधुर वाणी वंदना से हुआ । इस अवसर पर कॉलेज के दसवीं कक्षा के छात्र सूरज कुमार और अध्यापिका सुंदरम पांडेय ने हिंदी दिवस के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किये । हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में कवितालोक सृजन संस्थान के संरक्षक ओम नीरव द्वारा चन्द्र वाटिका शिक्षा संस्थान के व्यवस्थापक डॉ० चन्द्र कुमार मिश्र, समारोह अध्यक्ष अजय प्रसून, मुख्य अतिथि कुँवर कुसमेश, संयोजक संचालक राहुल द्विवेदी 'स्मित', कॉलेज के प्रधानाचार्य अजय कुमार वर्मा, अध्यापक अखिलेश वर्मा, अध्यापिका सुंदरम पांडेय और कार्यक्रम में पधारे सभी कवियों को उनके हिंदी साहित्य के उत्थान में विशिष्ट योगदान के लिए 'हिंदी रत्न’ सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया । कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों ने अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति के आधार पर मंचासीन अतिथि और विशेषज्ञों से हिन्दी-कविता के सन्दर्भ में अपने प्रश्न पूछे और मंच से उनके सटीक और रोचक उत्तर दिये गए। प्रश्न पूछने वाले बच्चों में दसवीं कक्षा के छात्र अनुराग यादव ने बोली और भाषा के अंतर को जानने की जिज्ञासा की, नवीं की छात्रा बुशरा फातिमा ने पूछा ‘लिपि क्या है’ और आठवीं के शिवांश शुक्ल ने फ़िल्मी गानों और साहित्यिक गीतों के मूल अंतर को जानना चाहा। इस अवसर पर कार्यक्रम में अपना योगदान देने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया जिनमे बुसरा फातिमा, सूरज कुमार, शिवांश शुक्ला व अनुराग यादव प्रमुख रहे । इस अवसर पर काव्य पाठ की कुछ झलकियाँ -
डॉ. अजय प्रसून जी -
'हिंदी भाषा अमर रहेगी, जगती तल में युगों युगों तक ।
यह जनवाणी मुखर रहेगी, हिंदी भाषा युगों युगों तक ।।'
कुंवर कुसमेश जी -
'एक ऊँची उड़ान हिंदी है ।
हिंदी की आन-बान हिंदी है ।।'
गौरव पाण्डे जी -
'उजाला माँ के चेहरे का न होता साथ जो मेरे,
सफर में दूर तक फैली हुई बस तीरगी होती ।'
नीलम भारती जी -
'मेरे टूटे हुए सपनों की तुम इक आस जैसे हो,
मेरी अनुभूति, मेरी प्रेरणा, विश्वास जैसे हो ।'
मुकेश कुमार मिश्र जी -
' माँ भारती ने पुकारा कभी तो
सदा क्रांति धारा इसी से बही है । '
मन्जुल मन्ज़र लखनवी जी - '
आग नफरत की यहाँ और जलेगी कब तक ?'
विपिन मलीहाबादी जी -
'जिंदगी भर का भरोसा तोड़ दो,
दिल लगा कर तुम छिपाना छोड़ दो ।'
सम्पत्ति कुमार मिश्र 'भ्रमर वैसवारी' जी -
'विकृति से दूर-दूर संस्कृति सुदेवन की,
देव नागरी तो बनी आज महारानी है ।'
शिखर अवस्थी जी
'मिलेगी कामयाबी यदि करें संघर्ष सब मिलकर ।'
कवियत्री विभा सिंह जी -
'डाल-डाल पर गा रही, कोयल सुंदर गीत ।
तन-मन भीगा देखकर, इस वसुधा की प्रीत ।।'
दिनेश अवस्थी जी -
'परस्पर रहा नही विस्वास,
मिलन के निष्फल हुए प्रयास । वार्ता कैसे हो श्रीमान ?'
योगेश पांडेय जी -
'आशुतोष सेवक हूँ बस यहीं जानता मैं,
प्राण में भी आप हैं प्रयाण में भी आप हैं ।'
राजाभैया गुप्ता 'राजाभ्' जी -
'अब की हिंदी दिवस में , ले नूतन संकल्प ।
निज भाषा उत्थान हित, खोजें नये विकल्प ।।'
अशोक शुक्ल अंजान जी -
'पूरी दुनिया में मात्र एक ऐसी भाषा है हिंदी ।'
महेश प्रकाश अष्ठाना 'प्रकाश'जी -
'हिंदी सहज अभिव्यक्त करते हमारे भाव ।'
प्रेम शंकर शास्त्री 'बेताब' जी -
'स्वरों से हो मुखर हिंदी जेहन में जान भर देती ।'
साहब दीन 'दीन' जी -
'भाषा हमारी हिंदी समर्थ, है शब्द कोष उन्नत भारी ।'
सीमा मधुरिमा जी -
'धरती के प्यार से आयी हूँ जान लो ।
तहजीब से मांगो तो सारा जहान लो ।।'
अखिल कुमार श्रीवास्तव 'व्यथित' जी -
'बिछ जायेगी चौसर भी न गोटियाँ होंगी ।
वक्त ऐसा आएगा न रोटियाँ होंगी ।।'
योगेश चौहान जी -
'एक सीस के बदले सौ नर मुंड हमे हर साल चाहिए ।
मन में उपजे प्रश्नों का उत्तर मुझको तत्काल चाहिए ।।'
राहुल द्विवेदी 'स्मित' -
' तिनका-तिनका बिखर रहा है यह प्यारा संसार ।
जाने किसने बना दिया है रिश्तों को ब्यापार ।।'
ओम नीरव -
जो अपने लिए चाहते हो वह औरों से भी व्यवहार करो जी।
हिन्दी को प्यार मिले सबका, सबकी यदि भाषा से प्यार करो जी।
काव्य पाठ करने वाले अन्य अवि थे - आशुतोष तिवारी जी, माधवी मिश्रा जी।
दोपहर 1 बजे से लगातार पाँच घंटे चलाने वाला यह हिन्दी दिवस समारोह आयोजन-प्रमुख डॉ चन्द्र कुमार मिश्र के धन्यवाद-ज्ञापन के साथ समाप्त हुआ।