मंगलवार, 25 अक्तूबर 2016

महोना- 'कवितालोक सृजन संस्थान काव्यशाला का सफल आयोजन'

          कवितालोक
         -------------       दिनांक- 25/10/2016

           कवितालोक सृजन संस्थान लखनऊ के तत्वावधान में काव्यशाला का आयोजन महोना के चन्द्र वाटिका शिक्षा निकेतन में व्यवस्थापक डॉ० सी.के. मिश्र जी के सौजन्य से व संस्थान के संरक्षक श्रीओम नीरव जी के संरक्षण में किया गया। आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार डॉ. अजय प्रसून जी ने की और संयोजन और संचालन युवा कवि राहुल द्विवेदी स्मित ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में महेश अष्ठाना जी और विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अशोक अज्ञानी जी तथा मिज़ाज़ लखनवी जी उपस्थित रहे।
       काव्यशाला का प्रारम्भ मिज़ाज़ लखनवी जी की सुमधुर वाणी वंदना से हुआ । इस अवसर पर अनेक कवियों ने छंद, मुक्तक, गीत, गीतिका, ग़ज़ल, व्यंग्य आदि के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर लिया ।
         कार्यक्रम का सबसे रोचक दौर तब रहा जब विद्यालय के बच्चों ने अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति के आधार पर मंचासीन अतिथि व विशेषज्ञों से साहित्य व कविता के सन्दर्भ में अपने प्रश्न पूछे और उनका संतुष्टि पूर्ण उत्तर प्राप्त किया । प्रश्न पूछने वाले बच्चों में तौहीद समानी (कक्षा-१०), महविश शेख (कक्षा-९), गौरव चौरसिया (कक्षा-८) तथा रिया मिश्रा (कक्षा-८) आदि प्रमुख रहे ।
        साथ ही कार्यक्रम के दौरान मिज़ाज़ लखनवी जी को 'गीतिका लोक रत्न सम्मान' और डॉ अशोक अज्ञानी जी को 'कवितालोक रत्न सम्मान' से सम्मानित भी किया गया ।इस अवसर पर :-------------
डॉ अजय प्रसून जी ने  'एक तीखी कटार है यारों, ये ग़ज़ल धारदार है यारों । मेरी ग़ज़ल ने जो भी बाँटा है, वो मेरे मन का प्यार है यारों ।।'
ओम नीरव जी ने 'सांवरे न बाँसुरी की धुन पे रहे भरोस, कालिये भी बाँसुरी बजा के डसने लगे ।'
महेश अष्ठाना 'प्रकाश' जी ने 'वंदे मातरम, वंदे मातरम, करें शहीदों को नमन। '
डॉ अशोक अज्ञानी जी ने 'गांव का ताल, अपनी दुर्दशा पर रोता है, लोग गंगा को बचाने की बात करते हैं ।'
मिज़ाज़ लखनवी जी ने 'जिंदगी दे रही तलाक मुझे, मौत से अब निकाह कर लेंगे ।'
राहुल द्विवेदी 'स्मित' ने ' जग के लोभी दांवपेंच मैं बिल्कुल नहीं समझता हूँ , मैं सूखा सागर सपनो का फिर भी बहुत बरसता हूँ ।'
उमाकान्त पांडे जी ने 'पलकों में मैं समेट लूँ वो बीते हुए पल, वो जिन्दी के पल मेरी वो जिंदगी के पल ।'
गौरव पाण्डे 'रूद्र' ने 'मौत से तो रूबरू होते रहे हम हर दफ़ा, जिंदगी ने और कुछ लिक्खी कहानी रात भर ।'
नीलम भारती ने ' चले आओ सनम अब तुम विरह के गीत गाती हूँ, बताता भोर है मुझको बुझे दीपक की बाती हूँ ।'
मुकेश कुमार मिश्र जी ने ' सर्वत्र है दैवीय सम्पदायें धरा से यहाँ स्वर्ण ही हैं उगाते । '
मन्जुल मन्ज़र लखनवी जी ने ' किया रचनाओं में तूने जमाने का जो चित्रण है, वहीं साहित्य तेरा आज इस दुनिया का दर्पण है ।'
विपिन मलीहाबादी ने 'बात ही बात में याद आने लगा, दिल तड़प कर उसी को बुलाने लगा ।'
भ्रमर बैसवारी जी ने 'वीर जवानों के दुश्मन को उसके घर में मारा है, भारत की जनता वीरों का लगा रही जयकारा है ।'
संदीप अनुरागी जी ने 'सरकार दे लुटाय तौ जानौ की नरेगा, मजदूरौ न चोटाय तौ समझौ नरेगा । सरकार की रकम का खाय खाय के, परधान जी मोटाय तौ जानौ कि नरेगा ।।'
सुन्दर लाल सुन्दर जी ने 'जन्मभूमि जननी की रक्षा हेतु जा रहा माँ, पूज्यनीय माँ हमारी धैर्य ना गंवाइयो ।'
अनिल कुमार श्रीवास्तव 'व्यथित' जी ने 'ये सुरमई अक्स हमें सोने नही देती, ये हमारा जज्बा तुम्हे खोने नहीं देता ।'
केदार नाथ शुक्ल जी ने 'दुम को सदा दबाने वाले यदि दुमदार नहीं होते , तो आतंकवादियों के पग सीमा पार नही होते ।'
भैरो नाथ पांडे जी ने 'रात है जगमग दिखे फिर भी अँधेरे, यह दिवाली तुम मना लो साथ मेरे ।'
आशुतोष मिश्र जी ने 'लिखते-लिखते लिख गया, दिल का ये उद्गार । सच्चा केवल प्रेम है, झूँठा है संसार ।'
योगेश चौहान जी ने 'वीर शहीदों की आत्मा हर्षित हो नाच रही होगी, स्वर्गलोक में जनगणमन की पंक्ति बाँच रही होगी ।'
आशुतोष 'आशु' जी ने 'फूल को खार करने लगे हैं, सिर्फ अँधियार करने लगे हैं ।'
पढ़कर खूब तालियां व वाह-वाही बटोरी ।

बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

राष्ट्रीय पुस्तक मेला में गीतिकालोक-परिचर्चा

"गीतिकालोक"
==========

            ओम नीरव प्रणीत 'गीतिका' विधा के लक्षण ग्रंथ 'गीतिकालोक' पर एक परिचर्चा का आयोजन मोतीमहल वाटिका लखनऊ में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेला 'गागर में सागर' के साहित्यिक मंच पर किया गया। इस आयोजन 'गीतिकालोक-परिचर्चा' की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के भाषाविज्ञान विभाग की पूर्व अध्यक्ष  प्रो डॉ उषा सिन्हा जी ने की तथा मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के काव्यशास्त्र विभाग के आचार्य प्रो डॉ हरी शंकर मिश्र जी थे। परिचर्चा से पूर्व सभी आमंत्रित समीक्षकों को कृतिकार ओम नीरव ने शाल उढ़ाकर और सम्मान पत्र भेंट कर 'गीतिका रत्न' मानद उपाधि से सम्मानित किया। इस भव्य आयोजन के पूर्व घोषित अध्यक्ष मा. उदय प्रताप सिंह कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान अपरिहार्य कारणवश नहीं आ सके।
           परिचर्चा का विषय-प्रवर्तन करते हुए छंदाचार्य रामदेव लाल 'विभोर' ने कृति को गीतिका-विधा के लक्षण ग्रंथ के रूप में स्वीकार करते हुए कहा कि गीतिका वास्तव में ग़ज़ल से जन्मी है किन्तु यह ग़ज़ल से भिन्न हैं और नीरव जी ने इसे एक स्वतंत्र हिन्दी काव्य विधा के रूप में स्थापित किया है। विभोर जी ने यह भी स्पष्ट किया किया कि कृति में छंदों का मापनी के आधार पर वर्गीकरण एक नयी और बहुत  उपयोगी परिकल्पना है।
          वरिष्ठ समीक्षक एवं दार्शनिक डॉ अनिल मिश्र ने कृति गीतिकालोक के अध्यायों की काव्यशास्त्रीय विवेचना करते हुए कहा कि गीतिका के प्रणयन से हिन्दी कविता को एक बड़ा विस्तार मिला है और लेखनी हिन्दी छंदों का सशक्त व्यापक धरातल प्राप्त हुआ है।
           मासिक पत्रिका 'ब्रज कुमुदेश' के संपादक वरिष्ठ छंदकार अशोक कुमार पाण्डेय 'अशोक' ने कृति में प्रतिपादित 'मापनी-विज्ञान' उदाहरण सहित विवेचना करते हुए बताया कि मापनियों के आधार पर छंदों की व्याख्या और मापनियों के निर्माण का सिद्धान्त नीरव जी की मौलिक एवं उपयोगी खोज है। अशोक जी ने कृति में संकलित रचनाओं के साथ उनके शिल्प के उल्लेख को एक अभूतपूर्व कार्य बताया और वर्णिक स्रग्विणी पर आधारित शिव नारायण यादव सारथी की रचना की विशेष सराहना की।
            वरिष्ठ नवगीतकार समीक्षक मधुकर अष्ठाना जी ने कृति में वर्णित गीतिका की सभी तत्वों की विवेचना करते हुए कहा गीतिका विधा के उद्भव से उर्दू न जानने वाले हिन्दी भाषी रचनाकारों में आत्मसम्मान की भावना का संचार हुआ है और इसीलिए गीतिका का सृजन त्वरित गति से आगे बढ़ चला है। आपने चन्द्र सेन विराट सहित अनेक रचनाकारों का उल्लेख किया जो स्वतंत्र रूप से गीतिकाओं का उत्कृष्ट सृजन कर रहे हैं।
                मुख्य अतिथि डॉ हरि शंकर मिश्र जी ने गीतिका की ग़ज़ल से भिन्नता को रेखांकित करते हुए कहा कि हिन्दी भाषा की प्रधानता, हिन्दी व्याकरण की अनिवार्यता और हिन्दी छंदों पर आधारित लय की विशिष्टता - यह तीन तत्व ऐसे हैं जो गीतिका को एक अलग पहचान देते हैं। आपने बताया कि अभी तक ग़ज़ल को हिन्दी काव्य शास्त्र में सम्मिलित करने में कठिनाई का सामना करना पद रहा था किन्तु गीतिका के लिए यह कार्य बहुत सुगम हो गया है। आपने आश्वासन दिया कि वे गीतिका-विधा को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में सम्मिलित कराने का भरसक प्रयास करेंगे।
          अंत में अध्यक्ष डॉ उषा सिन्हा ने गीतिका विधा के पल्लवन में कृतिकार नीरव की वैज्ञानिक दृष्टि, समन्वयवादी वृत्ति और अनुशासनप्रियता को रेखांकित करते हुए कहा कि गीतिकालोक कृति में गीतिका विधा का परिचय देने के साथ उसकी सांगोपांग विस्तृत व्याखाया की गयी है जो भाषा विज्ञान और छंद शास्त्र दोनों की कसौटी पर खरी उतरती है। आपने नीरव जी के रचे कई छंदों को सुनाया जिनमें गीतिका के मर्म को स्पष्ट किया गया है।
       इस अवसर पर सुल्तानपुर से पधारे अवनीश त्रिपाठी जी और इटौंजा से पधारे राहुल द्विवेदी स्मित जी ने गीतिका विधा पर गीतिका सुनाकर श्रोताओं मन मुग्ध कर लिया।        आयोजन की व्यवस्था में डॉ अजय प्रसून जी, उमाकांत पांडेय जी, हरीश चन्द्र लोहुमी जी, सुनील त्रिपाठी जी, श्याम फतनपुरी जी की भूमिका विशेष सराहनीय रही।
         समारोह में नगर के साहित्यकारों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर मंच का उर्साहवर्धन किया जिनमें कवि कमलेश मौर्य मृदु जी, राजाभैया गुप्ता जी, पद्मकान्त शर्मा प्रभात जी, सर्वेश अस्थाना जी, केदार नाथ शुक्ल जी, प्रदीप कुशवाहा जी, के.के.श्रीवास्तव जी, सहबदीन जी, केवल प्रसाद जी, संध्या सिंह जी, निवेदिता श्रीवास्तव जी, मनोज शुक्ल जी, अशोक अनजान जी, अनिल बाँके जी, आभा खरे जी, संध्या सिंह जी आदि के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।

रविवार, 16 अक्तूबर 2016

'करते शब्द प्रहार' का लोकार्पण, जयपुर

(ममता लड़ीवाल जी के शब्दों में)
=======================

           कवितालोक के वरिष्ठ सदस्य एवं चतुष्पदी समारोह के संचालक वयोवृद्ध कवि श्री लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी के प्रथम छांदस काव्य संकलन 'करते शब्द प्रहार' का लोकार्पण समारोह और कवितालोक जयपुर की प्रथम काव्य संध्या का आयोजन 12 अक्टूबर 2016 को जयपुर के अपैक्स इंस्टिट्यूट,मानसरोवर में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि देवर्षि कलानाथ शास्त्री जी और अध्यक्ष आदरणीय ओम नीरव जी (लखनऊ) की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम बहुत ही सफल रहा और उत्कर्ष तक पहुंचा। विमोचन समारोह का संचालन आदरणीया शोभा चंदर जी ने किया । विमोचन के उपरांत जल पान और बाद में कवितालोक काव्य संध्या का संचालन आदरणीय भूपेंद्र भरतपुरी जी एवं विजय मिश्र दानिश जी ने किया जिसमें अपने काव्य पाठ से श्रोताओं की रस विभोर करने वाले कवियों में मुख्य थे -:-:-

भोपाल से आदरणीय अशोक व्यग्र जी और दानिश जयपुरी जी।

नई दिल्ली से ममता लड़ीवाल जी।
बनारस से उदय प्रताप द्विवेदी जी।
बागपत से राजेश मंडार जी।
भीलवाड़ा से हरिओम सोनी 'हैरत' जी।
ब्यावर से वीणा शर्मा जी।
जयपुर से चंदर पारीक जी, सुनील जश्न जी, सुरेश गोस्वामी जी, सुशील सरना जी, विनीता सुराणा 'किरण' जी, साधना प्रधान जी, विपुल जैन जी, उजला लोहिया जी, शिवानी शर्मा जी, कविता मुखर जी, ज्योत्स्ना सक्सेना जी आदि।       
            इस अवसर पर आमंत्रित सभी कवियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। 6 घंटे तक चले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आदरणीय ओम नीरव जी ने अंत में सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया, मनमोहक एवं अति सुन्दर प्रस्तुति ने सभी को हर पंक्ति पर ताली बजाने पर विवश कर दिया। इस अवसर पर आमंत्रित सभी कवियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
      इतने सुन्दर आयोजन का हिस्सा होते हुए मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है।
                     जय माँ शारदे !

ममता लड़ीवाल
(पुत्री)
नई दिल्ली

राष्ट्रीय पुस्तक मेला लखनऊ में कवितालोक का सफल कार्यक्रम "एक शाम शहीदों के नाम"

कवितालोक काव्य समारोह - 'एक शाम शहीदों के नाम'
=====================================

राष्ट्रीय पुस्तक मेला 'गागर में सागर' के सभागार में कवितालोक सृजन संस्थान की ओर से आयोजित काव्य समारोह 'एक शाम शहीदों के नाम'  में मुख्य अतिथि के रूप में आमे शहीद कैप्टन मनोज पाण्डेय के पूज्य पिताश्री पंडित गोपी चन्द पाण्डेय को 'राष्ट्र-गौरव' सम्मान से सम्मानित किया गया ! समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ नवगीतकार मधुकर अष्ठाना जी ने और संयोजन-संचालन युवा ओज कवि उमाकान्त पाण्डेय ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में अनागत काव्य धारा के प्रवर्तक डॉ अजय प्रसून एवं वरिष्ठ कवि-संचालक कमलेश मौर्य मृदु उपस्थित रहे। इस अवसर पर कवितालोक के संस्थापक अध्यक्ष ओम नीरव  ने सहभागी सभी कवियों को 'कवितालोक गौरव' से सम्मानित किया। सम्मान समारोह के बाद काव्य पाठ का क्रम माँ शारदा की वाणी वंदना से प्रारम्भ हुआ जिसे कवयित्री स्वाति मिश्रा ने प्रस्तुत किया। सीतापुर से पधारे कवि केदार नाथ शुक्ल ने प्रारम्भ में ही अमर शहीद मनोज पाण्डेय पर ओजस्वी काव्य पाठ कर कार्यक्रम के शीर्षक को सार्थक कर दिया ---

शौर्य देख लोग चकराये जान पाये नहीं
ओज था मनोज में किओज ही मनोज था।

विशिष्ट अतिथि कमलेश मौर्य मृदु ने जनाक्रोश को कुछ इस प्रकार व्यक्त करते हुए श्रोताओं से वाहवाही प्राप्त की --

पाकिस्तान ज़िन्दाबाद का लगाए जो भी नारा,
उसको तो ज़िंदा दफनाया जाना चाहिए।

संचालक ओज कवि उमाकांत पाण्डेय ने शहीद मनोज पाण्डेय के प्रति सम्मान कुछ इसप्रकार व्यक्त किया-- - 

गांधी अशफाक़ वीर विस्मिल सुभाष चन्द्र
कैप्टन मनोज का है प्यार वंदे मातरम।

मंजुल मंज़र ने भारत के राष्ट्रीय गौरव की बात इन शब्दों में की -

किसी को जख्म अपनी ओर से पहले नहीं देता
ये हिंदुस्तान अपने धैर्य को खोने नहीं देता । 

सुनील त्रिपाठी ने गीतिका से श्रोताओं को रसविभोर करते हुए सुनाया -

याचना अब नहीं सिर्फ रण चाहिए।
घाट प्रतिघात प्रत्याक्रमण चाहिए।

ओम नीरव ने गीत सुनाया - 

मातृ भू कैसे करें तुझको नमन !
हैं अधूरे ही पड़े तेरे सपन

समारोह अध्यक्ष मधुकर अष्ठाना ने शहीदों के नाम गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया - 

शहीदों को नमन करना !
जिन्होंने शत्रुओं से युद्ध में सीखा नहीं डरना !

15 अक्टूबर को सायं 6:00 बजे राष्ट्रीय पुस्तक मेल मोती महल वाटिका लखनऊ मे 3 घंटे तक चले  इस समारोह में काव्यपाठ करने वाले अन्य कवियों में मुख्य थे -
डॉ अजय प्रसून, संदीप अनुरागी, अनिल बाँके, मिज़ाज लखनवी, इमरान अलियाबादी, राहुल द्विवेदी स्मित एवं कवयित्री स्वाति मिश्रा।

-:कवितालोक:-